दुनिया ऊछलता ऐक समन्दर
इन्सान है एक तैरती कश्ती
महंगी हो गई जिदंगी जहा मे
लेकिन मोत है सबसे ससती
जिदंगी उलझी ऐक पहेली
दुश्मन जिदंगी मोत सहेली
ना समझा ना कोई जाने
आपनी बस्ती ओर लोग बेगाने
रब ने तो ऐसे लिखे लेख
ना अपने ना अपना देश
बस रोटी पेट का खेल तमाशा
इन्सान जो बूत खुदा ने तराशा
खाली हाथ तु आया जहा मे
खाली हाथ है जाना
मै मै करता फिरे जहा मे
यहा का है बस यहा रहेगा तेरा माल खजाना
तु मिट्टी मिट्टी मे मिलेगा
फिर नया कोई फुल खिलेगा
होगा शुरू फिर सफर किसी का
अब बता तेरी क्या है हसती
महंगी हो गई जिदंगी जहा मे
लेकिन मोत है सबसे ससती ,,,,
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